KATHA SHRIMAD BHAGWADGEETA AT KHARMORA

सात दिवसीय श्रीमद् भागवद् गीता ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ खरमोरा में,
श्रीमद् भागवद् गीता ज्ञान यज्ञ का कार्यक्रम स्वागत गेट खरमोरा, हनुमान मंदिर के पास, कलश यात्रा निकाल कर शुभारम्भ की गई। ब्रह्माकुमारी लीना बहन ने कहा कि वास्तव में गीता का ज्ञान स्वयं की मनःस्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिये है। भगवान शरीर और आत्मा के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि जैसे व्यक्ति नये वस्त्र धारण करने के लिये पुराने वस्त्रों का त्याग करता है, वैसे ही आत्मा नया षरीर धारण किया है, उसे छोड़ना पड़ता है। ये शाश्वत् नियम है कि जिसने शरीर धारण किया है, उसे शरीर छोड़ना पड़ता है। आत्मा अविनाशी है, शरीर अविनाशी नहीं है। भगवान ने अर्जुन को कहा कि- हे अर्जुन! स्वधर्म को देखकर भी भय करने योग्य नहीं हो, क्योंकि धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर अन्य कोई परम कल्याणकारी मार्ग नहीं है। यदि तू धर्मयुक्त युद्ध नहीं करेगा तो स्वधर्म और कीर्ति दोनों को खोकर पाप का भागी होगा।

श्रीमद् भागवत गीता के चैदहवें अध्याय में सतो, रजो और तमो के रहस्य को बतलाते हुए गुणातीत व्यक्ति के लक्षण तथा आचरण के बारे में बतलाया है। अर्जुन फिर प्रष्न पूछते हैं कि किन गुणों से सम्पन्न साधक उस परम पद को प्राप्त होते हैं। भगवान ने उसकी विशेषतायें बताईं और कहा कि जिनका मान और मोह निवृत हो गया है। न उसको मान-शान चाहिए और न उसको किसी वस्तु या व्यक्ति का मोह है। जिन्होंने संगदोष को जीत लिया, जो आत्म-स्थिति में स्थित हैं। जिनकी कामनायें निवृत हो चुकी हैं और जो सुख-दुःख नामक द्वंद्वों से मुक्त हो गये हैं। ऐसे ज्ञानीजन उस अविनाशी पद को प्राप्त होते हैं। जिसके संस्कार सात्विक हैं वह आत्मा सतोप्रधान स्तर पर पहंॅुचकर सतोप्रकृति वाला शरीर धारण करती है। अंतःकरण की शुद्धि, ज्ञान, तपस्या, सरलता, अहिंसा, क्रोध मुक्ति, त्याग, शांति, परचिंतन और परदर्शन से मुक्ति, सर्व के प्रति दया एवं करूणा भाव, लोभ मुक्ति, मृदुता और विनयशीलता, दृढ़ संकल्पधारी, तेज, क्षमा, धैर्य, पवित्रता, ईष्र्या और सम्मान की अभिलाषा से मुक्त, ये उसके विशेष सद्गुण और दिव्य गुण होते हैं। जब मन की अवस्था परिपक्व हो जाती है तब भगवान जो आलौकिक प्रभाव वाला है, अजर, अमर, शाश्वत् गुणधर्म वाला है उसे यथार्थ जान सकते हैं। भ्राता एम.डी महन्त तथा बहन प्रेमा महन्त कथा यजमान के साथ उपस्थित जन समुदाय ने हवन तथा कथा आरती में भाग लिया। ब्रह्माकुमारी रूकमणी बहन ने सहस्त्र घारा सभी को नहलाया। आपने कहा कि आज आप सभी अपने अंदर की एक बुराई को इस ज्ञान यज्ञ में स्वाहा करें। भ्राता साधराम यादव, षंकर दयाल निषाद, संतोष पटेल, शिव कुमार निषाद, सोन साय तथा नेहा वर्मा ने भजनों के ़द्वारा सभी को भाव विभोर कर दिया।